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एक टेढे स्वास्तिक की कहानी

 हमारी संस्कृति का शुभ प्रतीक चिन्ह #एक_टेढ़े_स्वास्तिक_की_कहानी #हिटलर_का_सेनापति ....मेरी लिस्ट में मौजूद,.. एक "मित्र",.. ने एक जिज्ञासू (??) के तौर पर,.. एक बार मुझसे पूछा था.. कि,.. "अगर हिन्दू धर्म इतना विशाल था,.. कई हिन्दू राजाओं का अधिकार,.. पूरी पृथ्वी पर था,.. ऐसा ग्रंथों में बताया जाता है,..!! लेकिन भारत से बाहर,. कहीं इनके निशान नहीं हैं। क्या हिन्दू लोग,.. यही सिर्फ भारतीय उपप्रायदीप को ही पूरी पृथ्वी मान लेते थे??... असल बात ये है कि,.. ये सब हिन्दुओं के कोरे गप्प हैं।" (आज इनको भी ये पोस्ट पढनी चाहिए) ******** ....कल शाम मैं अपने मेन गेट पर, LED से बना हुआ स्वास्तिक लगाया,. और अन्दर आ गया। रात भर वो चमकता रहा और,.. आज सुबह ही एक "आपिये मित्र" आये और,.. कटाक्ष मारे,...."शुकुल जी, कट्टरता के बारे में सोचते सोचते,..अब आप हिटलर के ही फैन हो गए??" मुझे समझ ना आया,.. तो उन्होंने बाहर ले जा के दिखाया,.. स्वास्तिक की लाइट "45 deg" अपनी धुरी पर,.. घूम गई थी, और.. ....अब ये नाजी सेना के चिन्ह जैसी लग रही थी।  (वैसे,.. LED का स्वस्त...

आकस्मिक मौत

 तकरीबन 10 दिनो पहले कीं बात है हमारे साथ कार्य करने वाले एक दोस्त के बड़े भाई ने फांसी लगाकर जान दे दिया  मुझें आश्चर्य यह हुआ की इतना पढ़ा लिखा इंन्सान जो खुद़ एक शिक्षक था वह फाँसी कैसे लगा सकता है कितना भी भुलाने की कोशिश करता लेकिन दिमाग से यह बात बाहर ही नहीं निकल पा रहा था  तकरीबन एक सप्ताह तक मैं यही सो रहा था की कैसे कोई फाँसी लगा सकता है। लोग तरह-तरह के बाते करने लगे थे  मुझें बहुत बुरा लग रहा था और समय के अभाव में लिख नहीं पा रहा था सच कहूँ तो बात दिमाग में बैठ गया था कोई ऐसे कैसे कर सकता है लोग भी तरह तरह की बाते कर रहे थे।  आकस्मिक मौत सुनने के बाद व्यक्ति पीड़ा से पहले बेचैनी से घिर जाता है, कारण बहुत साधारण है और वो है एक असुरक्षा का भाव का अंदर घर कर जाना । बड़े बड़े सुपरस्टार, बिज़्नेसमैन और नेता जिनके पास खुद के जीवन को सुरक्षित रखने के तमाम संसाधन उपलब्ध रहते है, उनकी अकाल मृत्यु एक साधारण व्यक्ति को एक ऐसे आईने के सामने ढकेल देती है जिसमें वो खुद को देखने से भी डरने लगता है । सामाजिक संरचना ऐसी है इस समाज कि शंकित प्राणी अपने बारे में उतना व्...

हिंदुत्व

 हिन्दुत्व महान सनातन धर्म का वरदान है, हिन्दुत्व सत्य अहिंसा दया धर्म का अभियान है, हिन्दुत्व वेद पुराण आगम निगम त्रिपिटक ज्ञान है, हिन्दुत्व ॐकार मंत्र,त्रिदेवों का नाम, भगवान राम है, हिन्दुत्व सिर्फ गुणधर्म नहीं धर्मक्षेत्र का अनुसंधान है! हिन्दुत्व में शस्त्र-शास्त्र की शक्ति बसती, हिन्दुत्व है ईश्वर की स्तुति और है देशभक्ति, हिन्दुत्व में शरणागत को अभयदान देने की रीति, हिन्दुत्व को समझो कि ये प्राण प्रतिष्ठित बुतपरस्ती, हिन्दुत्व में राम कृष्ण बुद्ध जैन दस गुरुओं की हस्ती! हिन्दुत्व यज्ञ जप तप योग ध्यान है, हिन्दुत्व विश्व के सभी धर्मों का प्रतिमान है, हिन्दुत्व समस्त मानवीय दिव्य गुणों का खान है, हिन्दुत्व हिंद की आन बान शान मानवता की पहचान है, हिन्दुत्व पूजा है, अराधना है, साधना है, दैविक अनुष्ठान है! हिन्दुत्व में धार्मिक सहिष्णुता की वास है, हिन्दुत्व में क्रूरता बर्बरता पर नहीं विश्वास है, हिन्दुत्व के होने से समस्त सद्गुणों का विकास है, हिन्दुत्व में हिंसा द्वेष भाव का तनिक नहीं आभास है, हिन्दुत्व हरि कीर्तन भजन सत्संग सुमिरन व अरदास है! #जय_हिंदुत्व⛳ #जय_श्रीराम🙏⛳ #जय_...

क्षण

 ❤ कम बरसों में कितने अधिक क्षण हैं  जिनमें मिला जा सकता है  छुआ जा सकता है किसी प्रिय की आत्मा को   बिछड़ा जा सकता है  जैसे गंध खोती है दिसंबर की गुलाबी हवा में  मैं जो कांपता हुआ उगता हूँ किसी दरख़्त पर  शाम तक किसी का कहानी हो जाता हूँ  या फिर माटी की  यह ख्याल पुराना पड़ता जाता है कि बहुत दिन गुज़ारे जा सकते हैं सिर्फ एक ही ऋतू में  बहुत पहरों तक अपने मौन से आलाप हो सकता है  सोचता हूँ , कैसा होता है  नींद में कोई नाम पुकार लेना मैं कोलाहल से निकल कर चुप में गिर पड़ता हूँ  लम्बे दिनों की यात्रा में पास बैठा राहगीर पूछता है  कैसे ठीक होता है रूँधा कंठ  मैं हंसता हूँ  कहता हूँ - बहुत बार लम्बी यात्रा में लौट आता है स्वाद की स्मृति  लौट आता है सुख  बहुत बार नए दुःख का चेहरा पुराने दुखों से मिलने लगता है  अक्सर पानी अपनी जगह दोहराने लगता है। #संदीप_यदुवंशी  https://sk4635686.blogspot.com/?m=1

काशी विश्वनाथ कॉरीडोर

 “काशी विश्वनाथ कॉरीडर" का विस्तारीकरण एक स्वागतयोग्य उद्यम है । जो लोग कहते हैं कि एक से दो सहस्र वर्ष पुराने कुछ मन्दिर तोड़े गये — उनको इस प्रश्न का उत्तर देना चाहिये कि १९५ करोड़ वर्ष पुराने विश्वनाथ मन्दिर का रास्ता बाधित करने की छूट उन कलियुगी मन्दिरों के धन्धेबाजों को किसने दी थी?  एनक्रोचमेण्ट दो वर्ष पुराना हो अथवा दो सहस्र वर्ष पुराना,एनक्रोचमेण्ट तो एनक्रोचमेण्ट ही कहलायेगा । काशी “विश्वनाथ” की है अथवा एनक्रोचमेण्ट वालों की? नरेन्द्र मोदी के एक अप्रचारित गुप्त कार्य का उल्लेख मीडिया नहीं करती । काशी विश्वनाथ के नवीन गेट नम्बर−४ को VIP गेट बना दिया गया है — जो ज्ञानवापी मस्जिद नाम से विख्यात असली प्राचीन विश्वनाथ मन्दिर के पिछवाड़े से गुजरती है । औरंगजेब ने उस मन्दिर को मस्जिद का रूप तो दे दिया किन्तु मन्दिर का पिछवाड़ा पुराना ही रह गया,जो शत−प्रतिशत हिन्दू मन्दिर वाला है । ज्ञानवापी “मस्जिद” के गर्भगृह में अभीतक पुजारी द्वारा नियमित पूजन बन्द नहीं कराया जा सका है । श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर के प्रमाण हेतु खुदाई करनी पड़ी,परन्तु ज्ञानवापी मन्दिर का पिछवाड़ा बिना खुदाई के ही स...

आख़िरी सफ़र

 आख़िरी सफ़र पर जाने से पहले इतनी तो मोहलत मिलनी चाहिए जाने वाले को कि वो कह सके अलविदा और सुकून से रवाना हो सफर के लिए इतनी तो रहमत मिलनी चाहिए पीछे रह जाने वालों को कि वो खुद को दिलासा दे सकें- जो चला गया वो नहीं लौटेगा और मशगूल हो जाएं अपने रोज़गार में बिना विदा लिए जाने वाले यूँ तो नहीं लौटते कभी मग़र सच ये है कि वे जाकर भी जाते नहीं  वे रह जाते हैं दरवाजे पर होने वाली आहटों में रास्ते के उस मोड़ पर जहाँ से वे जाते हुए पलटकर देखा करते थे वे रह जाते हैं दिलों की कसक में कि काश! इतना सा वक्त मिल गया होता...। स्नेहिल शुभ संध्या नमस्कार हरे कृष्ण🙏 https://sk4635686.blogspot.com/?m=1 #संदीप_यदुवंशी

भोजपुरी सम्राट

 पद्मश्री पुरस्कार और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित शारदा सिन्हाजी ने आज तक नहीं कहा की मेरी वज़ह से भोजपूरी को पहचान मिली लेकिन ये पूदीना और नेनूया लहसुन गाने वाले बोल रहे है मेरी वज़ह से भोजपूरी को पहचान मिला  अच्छे अच्छो का घमंड टूटा है तुम कौन सी खेत की मुली हो  खैर  पद्मश्री से अलंकृत एवं बिहार में लोक नाट्य परंपरा के जनक श्री भिखारी ठाकुर जी की जयंती पर उन्हें नमन करता हूं। वे भोजपुरी के समर्थ लोक कलाकार, रंगकर्मी व लोक जागरण के संदेश वाहक होने के साथ ही लोक गीत एवं भजन कीर्तन के अनन्य साधक भी थे। #BhikhariThakur #bhojpuri  #संदीप_यदुवंशी https://sk4635686.blogspot.com/?m=1

रजनीकांत सर "अन्नाथे"

 ऐसे तो मैं ज्यादा फ़िल्में देखता नहीं हूँ लेकिन कल वीकेंड छुट्टी तो  साउथ की एक फिल्म देखी कल, "अन्नाथे" साउथ की फिल्मों की खासियत ये है कि उनमें कहानी होती है और एक साथ बहुत सी कहानियाँ भी चलती हैं। इसलिए मुझे दक्षिण भारत का सिनेमा बहुत पसंद है। वो लोग प्रेज़ेंटेशन के साथ साथ स्क्रिप्ट पर भी बहुत काम करते हैं जो कि सबसे ज़रूरी होता है कनेक्ट करने के लिए। अन्नाथे कहानी है भाई बहन की। भाई बहन के प्यार, एक दूसरे के लिए जान देने को आतुर रिश्ते की। एक भाई जिसकी दुनिया उसकी बहन ही है। एक ही सोच है, बहन। एक ही व्यवहार है, बहन। एक ही जीवन शैली है, बहन। जिस ट्रेन से बहन आती है उस ट्रेन के सारे यात्रियों के खाने पीने की व्यवस्था वो करता है हर बार। बहन के लिए रिश्ता देखने जाता है तो लड़के से कहता है, "चिंता मत करो हम तुम्हारी आँखों में आँसू नहीं आने देंगे।" ऐसे ऐसे सीन हैं जो हँसाते हैं और आपके सामाजिक टेबू को साइड से दो टुकड़े करके पटक देते हैं।  मुझे इस दुनिया का सबसे प्यारा रिश्ता लगता है भाई बहन का। मैं बचपन से ही घर से दूर रहा हूँ पहले पढ़ाई के लिए और अब चंद सिक्कों के ...

पद्मश्री तुलसी गौड़ा 2021

 पद्मश्री को सम्मानित करती कर्नाटक की पर्यावरण कार्यकर्ता तुलसी गौड़ा,  जिनको वन विश्वकोष के नाम से भी जाना जाता है।   तुलसी का जन्म कर्नाटक के हलक्की जनजाति के एक परिवार में हुआ था। बचपन में उनके पिता चल बसे थे और उन्होंने छोटी उम्र से मां और बहनों के साथ काम करना शुरू कर दिया था। इसकी वजह से वे कभी स्कूल नहीं जा पाईं और पढ़ना-लिखना नहीं सीख पाईं। 11 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई पर उनके पति भी ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहे।  अपनी जिंदगी के दुख और अकेलेपन को दूर करने के लिए ही तुलसी ने पेड़-पौधों का ख्याल रखना शुरू किया। वनस्पति संरक्षण में उनकी दिलचस्पी बढ़ी और वे राज्य के वनीकरण योजना में कार्यकर्ता के तौर पर शामिल हो गईं। साल 2006 में उन्हें वन विभाग में वृक्षारोपक की नौकरी मिली और चौदह साल के कार्यकाल के बाद वे आज सेवानिवृत्त हैं। इस दौरान उन्होंने अनगिनत पेड़ लगाए हैं और जैविक विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।    72 साल की तुलसी गिनकर नहीं बता सकती कि पूरी जिंदगी में उन्होंने कितने पेड़ लगाए। 40 हजार का अंदाजा लगाने वाली तुलसी ने करीब...

पद्मश्री लुलारी जी 2021

 12 साल की उम्र में शादी, गरीबी की मार अलग... घरों में काम करने वाली दुलारी ने खुद नहीं सोचा था कि उनका संघर्ष उन्हें पद्मश्री दिलाएगा। देश का वो सम्मान जिसे पाने की चाह हर किसी में होती है। लेकिन दुलारी को पद्मश्री पुरस्कार मिलने के पीछे छिपा है उनका अनवरत संघर्ष... वो संघर्ष जिसमें एक पुरुष तक हार मान जाए लेकिन 54 साल की दुलारी ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया। बिहार के मधुबनी जिले के रांटी गांव की रहने वाली दुलारी का माता-पिता ने 12 साल की उम्र में ही  विवाह कर दिया। सात जन्मों के बजाए दुलारी सात साल में ही ससुराल से मायके वापस आ गईं और वो भी 6 महीने की बेटी की मौत के गम के साथ। मायके से ही दुलारी ने फिर से संघर्ष शुरू किया। घरों में झाड़ू-पोंछा लगा कर कुछ आमदनी हो जाती थी। धीरे धीरे हाथों में पोंछे की जगह कूची ने ले ली।  हाथों में जादू ऐसा कि एक वक्त पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी दुलारी की तारीफ की। किस्मत कब किसे किस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दे, कौन जाने। यही दुलारी के साथ हुआ। अपने ही गांव में मिथिला पेंटिंग की मशहूर आर्टिस्ट कर्पूरी देवी के घर दुलारी को झाड़ू-...

पद्मश्री 2021

 #मेरा_अभीमान_मेरा_प्रधानमंत्री💪 नंगे पैर, अधनंगे बदन.... राष्ट्रपति भवन की दहलीज.... ताज्जुब है ना.... संतरे बेचने वाले हरकेला हबजा पद्मश्री पाते हैं। उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के लिए निशुल्क विद्यालय खोलने का काम किया। वह नंगे पांव राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री का पुरस्कार लेने के लिए आते हैं। सवाल यह नहीं है कि उन्हें पुरस्कार उनके काम के लिए मिला....! प्रश्न यह है कि उनके काम को किसी ने देखा...! प्रधानमंत्री के आवास के भीतर रहने वाले व्यक्ति ने सुदूर कर्नाटक में जनसेवा का काम करने वाले शिक्षा की अलख जगाने वाले हरकेला हबजा को पद्मश्री के लिए नामित किया...... दूसरी तस्वीर तुलसी गोवडा की है.... शरीर को ढकने के लिए वस्त्र नहीं है लेकिन राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री का पुरस्कार पाने के लिए पहुंच रही हैं। पर्यावरण के लिए काम किया है। 30,000 से ज्यादा वृक्षों को लगाया है। लेकिन उनके काम को मान्यता देने का काम एक चाय बेचने वाले ने किया है जो चाय बेचते बेचते प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच गया है। जब जनता के बीच के लोग सत्ता के गलियारों में  बैठेंगे तो जनता के बीच में काम करने वाले लोगों क...

टीवी सीरियल्स की नौटकी

 ये टीवी सीरियल्स में कौन से परिवार होते हैं भाई जिसमें पति ऐसी पत्नी के साथ होता है जिसे वो पत्नी मानता नहीं और जिसे मानता है पत्नी वो भी उसी घर में रहती है फिर दोनों औरतें पति को हासिल करने के लिए चालें चलती हैं, जिसमें पत्नी की मां और उसके पिता, जो कि दरअसल उसके पिता नहीं हैं बल्कि पिता माने जाते हैं और ये सर्वज्ञात तथ्य रहता है, शामिल होते हैं और साथ ही जो दूसरी औरत होती है उसकी मां और बहन भी उसी घर में रहते हैं। इसी घर में ननद होती है वो भी शादी-शुदा  जिसकी अपनी ससुराल से नहीं बनती इसलिए उसके पति घरजवाई बनकर रहते हैं उसी घर में। साथ में ननद की एक सहेली और उसका पति, जो कि उसी घर के सो कॉल्ड मालिक का एम्प्लॉय होता है, भी रहता है। मतलब चल क्या रहा होता है भाई🤔 अच्छा हां, इन सीरियल्स की सबसे खास बात ये रहती है कि सबको सबकी चालें मालूम होती है लेकिन सब सबको बर्दास्त करने के लिए मजबूर होता है पता नहीं क्यों? मतलब ऐसा घर कहां बनता है भाई? किसी को मालूम है क्या?? मतलब टीवी सीरियल के नाम पर कुछ भी #संदीप_यदुवंशी  https://sk4635686.blogspot.com/?m=1

बलिया स्थापना दिवस 1 नवम्बर

 #बलियानामा  बहुत छोटा था तब ये भी कहाँ पता था कि लोक सभा क्या होता है और विधानसभा क्या होता है। लेकिन उस वक़्त नेताओं की गाड़ियों और आसमान में उड़ते हेलिकॉप्टर ये बताने के लिए काफ़ी थे कि इलेक्शन आ चुका है और छोटे-बड़े खाली मैदान पर "जिंदाबाद-मुर्दाबाद" के नारे लागाए जा रहे  थे।  लेकिन आज भी इस जिले को एक नेता की कमी खलती है #चंद्रशेखर_जी शायद उनकी कमी कोई पूरा नहीं कर सकता है। रहने को तो कही भी रह ले पर दिल❤ बलिया में ही रह जाता है  ज़िन्दगी भले कही भी जी ले पर मरना तो मै बलिया में ही चाहता हूँ   क्योंकि मुक्ती और मोक्ष बलिया के सिवा कहीं मिलेगा नहीं  क्योंकि तेरे हर कण-कण में मेरी पहचान है। "वीरों की धरती जवानों का देश  बागी बलिया उत्तर प्रदेश" भृगुक्षेत्र मनोहर है बलिया, बलियाग रहा बहुकालन से। बलि राजन की धरती तप की, यह शोभित है भृगवाश्रम से।। स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले, बागियों की धरती बलिया के स्थापना दिवस पर आप सभी को बधाईयां, शुभकामनाएं.... #संदीप_यदुवंशी  https://sk4635686.blogspot.com/?m=1

विरोध

 विरोध एक अजीब सी बात है विरोध करना ! पक्ष और विपक्ष दोनों है इस पर बहस चलता है। तर्क और कुतर्क भी होता है इन सब को करते समय चलता है। पर फर्क उस व्यक्ति को पड़ता है जो अपने रोजमर्रा की ज़िंदगी में हारता है और हारता हुआ फिर से  अगली सुबह उस विरोध में रहता है। कुछ यूँ ही मैं भी विरोध करता हूँ पर अब किसी के छल विरोध से खुद और खुद को विरोधी देखा। ये समाज उनका है  जो मेरे विरोध को  अपने सम्मान और पहचान  के रूप में मुझे  मौत तक ले आई है। विरोध करना भी अब विरोध है सब खोकर कोई विरोध नही। मुझे नही करना ये संघर्ष इश्क़ है मुझे इस विरोध से पर मैं भी अकेला पत्थर हूँ और अब टूट चुका हूँ। ना कोई विरोध है और ना मैं विरोधी हूँ।🙏 #संदीप_यदुवंशी  https://sk4635686.blogspot.com/?m=1

धनतेरस

 आज धनतेरस उत्सव है। एक सामान्य चलन था कि इस दिन झाड़ू खरीदते हैं। अब क्या झाड़ू खरीदने के लिए भी किसी त्यौहार की जरूरत होती है। हालांकि ये प्रतीकात्मक ही है लेकिन इस प्रतीक के गहरे अर्थ है। झाड़ू खरीदने का आशय स्वच्छता से है। घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए झाड़ू की प्रतीकात्मक खरीदारी का चलन शुरु हुआ होगा। क्योंकि आगे दो दिन बाद दिपावली है। सब साफ सफाई करनी है तो धन तेरस को झाड़ू खरीदने का दिन बना दिया।  लेकिन अब बदलते बदलते बाजार ने इसे बर्तन, सोना चांदी और गाड़ियों की खरीदारी का त्यौहार बना दिया है।  परंतु धनतेरस झाड़ू खरीदने का भी त्यौहार नहीं है। यह भगवान आरोग्य के देवता, नारायण स्वरूप भगवान धन्वंतरी की जयंती है। साफ सफाई के लिए सांकेतिक खरीदारी का दिन भी संभवत: इसलिए ही चुना गया होगा की स्वच्छता में ही आरोग्य है। इसलिए भगवान धन्वंतरी  जयंती को स्वच्छता से जोड़ा गया होगा। लेकिन आश्चर्य देखिए कि खरीदारी शेष रह गयी और भगवान धन्वंतरी को भूल गये।  आज के दिन भगवान धन्वंतरी को याद करिए क्योंकि धन अकेले पैसा नहीं होता। असली धन है स्वास्थ्य। आरोग्यं स...

तमिल एक्टर विशाल

 सरल और साधारण से दिखने वाले इस शख्स को आज से पहले मैं भी नहीं जानता था "पुनीत राजकुमार" की मृत्यु के बाद कल जब तमिल के स्टार 'विशाल' का नाम सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगा तब थोड़ी सी उत्सुकता हुई कि आखिर यह कौन है??? और आज जब इनके बारे में पढ़ा तो लगा कि हम अपने गलत रोल मॉडल चुन रहे हैं ??? असली रोल मॉडल्स के बारे में तो हमें, ना बताया जाता है, और ना ही कभी उनका प्रचार-प्रसार किया जाता है और उन्हीं रोल मॉडल्स में से एक हैं विशाल💐 45 फ्री स्कूल, 26 अनाथालयों, 19 गौशालें और 16 ओल्ड एज होम की स्थापना करने के साथ साथ 1800 छात्रों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने वाले एक्टर पुनीत राजकुमार के निधन के बाद अब उन 1800 छात्रों की देखभाल की जिम्मा तमिल एक्टर विशाल ने उठाया है.... सिंपल से दिखने वाले साउथ इंडस्ट्री के #सुपरस्टार एक्टर विशाल ने ट्विटर पर पुनीत के निधन के बाद लिखा था ‘मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मेरे अच्छे दोस्त पुनीत राजकुमार अब नहीं रहे. उनकी आत्मा को शांति मिले. इस मुश्किल वक्त में मेरी संवेदना परिवार के साथ है. #कन्नड़ #फिल्म इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी क्षति...

आज कल के बच्चो में नास्तिकता के कारण

 आजकल के युवकों की नास्तिकता का कारण मैं बता रहा हूँ ध्यान से सुनिये- एकाएक तो माँ के गर्भ से कोई युवक होकर या युवती होकर तो प्रकट नहीं होता...!  आजकल के बच्चे हैं मोबाइल से खेलते हैं, टेलीविजन से खेलते हैं, कम्प्यूटर से खेलते हैं। वे जब कोई प्रश्न कर देते हैं माता-पिता को, तो प्राचीन ढंग के जो माता-पिता हैं वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाते।  पुरानी बात यह है कि 'तुम तो नास्तिक हो' कहकर, डाँटकर पिण्ड छुड़ा लेते थे।  हमने देखा है वृन्दावन आदि में जो महात्मा किसी प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाता था तो वे कहते थे - 'नास्तिक कहीं के, तुम अनधिकारी हो'।  आजकल किसी को नास्तिक कह दें, अनधिकारी कह दें तो वह समझेगा कि इनको स्वयं को ही कुछ आता नहीं है।  आजकल मोबाइल आदि से खेलने वाले जो बच्चे हैं वे ही युवक होते हैं, उनके प्रश्नों का उत्तर दे पाना आधुनिक माता-पिता के लिए बड़ा कठिन है। आधुनिक जो बच्चे हैं,  वे जो प्रश्न करते हैं उसके उत्तर के लिए क्या चाहिए? दर्शन, विज्ञान और व्यवहार में सामञ्जस्य साधने की आवश्यकता है। स्वयं ही बहुत तैयारी की आवश्यकता है। मैं संकेत करता ...

तजुर्बे

 अब मैं.. तजुर्बे के मुताबिक़,,,खुद को ढाल लेता हूं,,! कोई प्यार जताए तो,,,जेब संभाल लेता हूं,,,!! नहीं करता थप्पड़ के बाद,,,दूसरा गाल आगे,,! खंजर खींचे कोई,,, तो तलवार निकाल लेता हूं,,,!! वक़्त था सांप की,,,परछाई डरा देती थी,,! अब एक आध मै,,,आस्तीन में पाल लेता हूं,,!! मुझे फासने की,,,कहीं साजिश तो नहीं,,! हर मुस्कान ठीक से,,,जांच पड़ताल लेता हूं,,,!! बहुत जला चुका उंगलियां,, मैं पराई आग में,,! अब कोई झगड़े में बुलाए,, तो मै टाल देता हूं,,,!! सहेज के रखा था दिल,,,,जब शीशे का था,,! पत्थर का हो चुका अब,,, मजे से उछाल लेता हूं......!!! #संदीप_यदुवंशी  https://sk4635686.blogspot.com/?m=1

राम मंदिर के वो दिन

 किसी को वो वक्त भी याद आता है क्या..... जब वेटिकन की पालतू इटालियन की कठपुतली महामौन सरदार के वक्त राम जन्मभूमि के वकील कोर्ट से भगवान राम पर लगे टेंट को बदलने हेतु प्रार्थना कर कहते थे "श्रीराम मंदिर पर लगा टेंट फट चुका है, बदलवा दीजिए"🙏 ऐसा लगता था की किसी ने सीधे दिल पर वार कर हमारी बेबसी पर हमें बुरी तरह अपमानित कर रहा है।।🙏  परन्तु फिर भी हमें कांग्रेस को सपोर्ट करना चाहिए क्योंकि वही एकलौती ऐसी पार्टी है जो देश और बेरोजगारी महंगाई के लिए फिक्रमंद है। और ७० साल से बेरोजगारी के खिलाफ लड़ रही है।   वोह अलग बात है की इस साल बेरोजगार लोगों ने 3 लाख करोड़ की दिवाली मना डाली जिसमे 40 हज़ार करोड़ के पटाके जला डाले और 75000 करोड़ का सोना खरीद डाला  वो अलग बात है कि उस पार्टी का युवराज भले ही बेरोजगार हो। जय श्रीराम ⛳🙏 #संदीप_यदुवंशी https://sk4635686.blogspot.com/?m=1

रामलिला

 रामलीला  आज जब दलितों के नाम पर राजनीति होते देखता हूँ और समाज के एक वर्ग को दलित हितचिंतक बन हिन्दू देवी-देवताओं को कोसते देखता हूँ तो हँसी भी आता है और ऐसे लोगों की बुद्धि पर तरस भी जो ये तक नहीं जानते कि छुआछूत या जाति भेद सनातन धर्म का रचा नही है बल्कि स्वार्थ सीधी के लिए रचित  एक राजनैतिक कुचक्र है। ऐसे में राम जी और शबरी मैय्या का मिलन याद आ जाता है। राम की आधार सीता थी। सीता अर्थात पृथ्वी की पुत्री, जगत की आधार, सबका आलम्बन। आधार खोने से राम जड़-हीन हो व्याकुल हो उठे। वे चर-अचर सबसे पूछते फिरे - "हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी। तुम्ह देखी सीता मृगनैनी॥" तुलसीदास लिखते हैं कि राम सामान्य मनुष्यों की लीला कर रहे हैं अतः वे पूर्णकाम, आनन्द राशि, अजन्मा और अविनाशी हो कर भी मनुष्यों की भाँति आतुरता दिखा-दिखा कर विलाप कर रहे हैं -  "पूरनकाम राम सुख रासी। मनुजचरित कर अज अबिनासी॥" सीता माता की खोज कठिन थी पर पहला संकेत जटायु ने दिया, दूसरा संकेत कबन्ध नामक दानव ने दिया। उसके उपरांत शबरी की कुटिया में उन्हें पम्पानगरी जाने का संकेत मिला। शबरी भीलनी है, समाज की वर्ग-श्रेणी ...